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Chand Dynasty

**Chand Dynasty (चंद राजवंश)** of Kumaon. Here are the key points covered **1. Founder and Origin (संस्थापक और उत्पत्ति):** * **Somchand (सोमचंद)** is considered the founder by Atkinson and Badridatt Pandey. * **Yoharchand (योहरचंद)** is considered the founder by W. Fraser, Francis Hamilton, and Harshdev Joshi (around 1018 to 1027 AD). * **Somchand's Origin:** * Some accounts say he was the brother of the Kannauj ruler and was brought to Kumaon by representatives of the Katyuri ruler Brahmadev. * Brahmadev married his daughter, Champa, to Somchand and gifted him Champawat as a dowry. * Another theory suggests he was from Jhusi (झूसी प्रदेश). **2. Key Rulers and Their Works (प्रमुख राजा व उनके कार्य):** The document lists many rulers and their contributions, including: * **Somchand:** Built the Raj Dunga Fort (राज ढुंगा किला), was a worshipper of Shiva (शिव का उपासक), defeated the Rawat Raja of Donkot (दोणकोट). * **Indrachand (इन्द्रचंद) (758-778):...

ज्वाड़ : ज्वाड़ का अर्थ 'स्त्रीधन

ज्वाड़ : ज्वाड़ का अर्थ 'स्त्रीधन' यह गढ़वाल मंडल के उ.का. जनपद में यमुना के तटवर्ती क्षेत्र जौनपुर की एक पराम्परागत सामाजिक प्रथा है। जिसके अनुसार विवाह के समय लड़की को स्त्रीधन के रूप में जो नकद धनराशि प्राप्त होती है तथा माता-पिता के द्वारा उसकी व्यक्तिगत सम्पत्ति के रूप में जो पशुधन- गाय, भैंस, बकरी, मुर्गी आदि, दिये जाते हैं उसे 'ज्वाड़' कहा जाता है यह उसकी व्यक्तिगत सम्पत्ति होती है और उस पर उसके ससुराल वालों को कोई अधिकार नहीं होता है। उसे वह चाहे तो अपने मायके में ही रख सकती है और चाहे तो ससुराल में भी ले जा सकती है। इसको अथवा उससे प्राप्त आय को व्यय करने का अधिकार केवल उसी को होता है। आवश्यकता पड़ने पर यदि उसका पति या कोई अन्य व्यक्ति उसकी ज्वाड़ की पूंजी से धन उधार लेता है तो उसे उसको ब्याज सहित लौटाना होता है।

देश का पहला ऑल एज ऑल वेदर रनिंग ट्रैक उत्तराखंड के गढ़ी कैंट देहरादून बनाया गया है.

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भारतीय सेना देहरादून के महिंद्रा ग्राउंड में देश का पहला ऑल एज-ऑल वेदर रनिंग ट्रैक बनवाया गया है ।  खास बात यह है कि 850 मीटर लंबे इस ट्रैक के निर्माण में इस्तेमाल की जा रही टाइल्स और शेड को प्लास्टिक वेस्ट मैटेरियल से बनाया गया है। 

Uttarakhand practice set

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उत्तराखंड के पंवार वंश का इतिहास

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उत्तराखंड के पंवार वंश का इतिहास | History of Panwar Dynasty of Uttarakhand By Suresh Guruji परमार या पंवार वंश  | Parmar or Panwar Dynasty चांदपुर में परमार वंश या पंवार वंश की नींव पड़ी। चांदपुर गढ़ का प्रतापी शासक  भानुप्रताप  था। परमार वंश का संस्थापक कनकपाल था। पंवार वंश का प्राचीनतम अभिलेख  1455 ई0  का राजा जगतपाल का मिला। प्राचीनतम अभिलेख देवप्रयाग के रघुनाथ मन्दिर से प्राप्त हुआ। एटकिंसन द्वारा दी गई पंवार शासकों की सूची को अल्मोड़ा सूची कहा जाता है। पंवार राजाओं की सूची के बारे में 04 अलग-अलग सूची प्राप्त है। विकेट की सूची सर्वाधिक मान्य है क्योंकि यह सूची सुदर्शन शाह के सभासार ग्रंथ से मेल खाती है। पंवार वंश के कुल 60 शासक हुये। गढ़वाल वर्णन  पुस्तक के लेखक हरिकृष्ण रतूड़ी है। गढ़वाल जाति  प्रकाश पुस्तक के लेखक बालकृष्ण शांति भट्ट है। प्रसिद्ध गढ़वाली मुद्राएं | Famous Garhwali Currencies – पंवार वंश फतेहशाह ने अष्टकोण रजत मुद्रा जारी की थी। जउ एक प्रकार की मुद्रा जो लद्दाख टकसाल में बनती थी। 1 तिमारी बराबर 10 टका होता था। 40 टका  बराबर एक गढ़वा...